• ICPR

संक्षिप्त परिचय:

अध्यक्ष की जीवनी का नोट:


 

प्रोफेसर एस.आर.भट्ट

अध्यक्ष
भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद
36 तुगलकाबाद इंस्टीट्यूशनल एरिया
नई दिल्ली – 110 062 
दूरभाष: +91-11- 2990 1503 
फैक्स: +91-11-29964755 
ई-मेल: srbhatt39@gmail.com

प्रोफेसर एस.आर.भट्ट के बारे में प्रोफेसर एस.आर.भट्ट एक प्रख्यात दार्शनिक और संस्कृतवादी हैं। वर्तमान में आप मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार अन्तर्गत भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् के अध्यक्ष हैं। आप इंडियन फिलॉसफिकल कांग्रेस और एशियन फिलॉसफी कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं। आप पूर्व में अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के अध्यक्ष भी (General President) रह चुके हैं। दर्शनशास्त्र विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर के रूप में आप सेवानिवृत्त हुए। आप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, प्राचीन भारतीय संस्कृति, बौद्ध धर्म, जैन और वेदांत के लब्धप्रतिष्ठित विद्वान के रूप में जाने जाते हैं। आपने भारत एवं चीन, श्रीलंका जापान, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, तुर्की, जर्मनी, संयुक्त राज्य अमेरिका और त्रिनिडाड आदि विदेशों के अनेक विश्वविद्यालयों के अनुसंधान संस्थानों में व्याख्यान दिये हैं।  आप राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विभिन्न संगठनों के सदस्य हैं। आप वाशिंगटन डीसी, संयुक्त राज्य अमरीका की मूल्य एवं दर्शन परक अनुसंधान परिषद के क्षेत्रीय सलाहकरा एवं समन्वयक समिति के सदस्य हैं, जो विश्व संस्कृतियों और सभ्यताओं पर 300 से अधिक संस्करणों को लाई है।
प्रो. भट्ट, अनेक प्रतिष्ठित पुरस्करों को प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें विशेषतः प्रणवानंद पुरस्कार, वाचस्पति पुरस्कार, दर्शनश्री पुरस्कार और संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा लब्धप्रतिष्ठित बौद्धविचारक पुरस्कार हैं।
 प्रो. भट्ट, ऑफ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी, शिमला की गवर्निंग बॉडी और सोसाइटी के सदस्य, और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कोर्ट एवं कार्यकारी काउंसिल के सदस्य, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सदस्य,  सांची बौद्ध और भारतीय अध्ययन विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश के मैन्टॉर ग्रुप के सदस्य, जनरल काउंसिल, एक्ज़ीक्यूटिव परिषद और वित्त समिति की भी सदस्य हैं। आप अनेक शैक्षिक और सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े हुए हैं।
प्रो. भट्ट ने 50 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, सेमिनारों और कार्यशालाओं का आयोजन किया है। आपने कई राउंड टेबल कार्यक्रमों का आयोजन किया है और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के आमंत्रित सत्रों में भाग लिया है। उनके द्वारा आयोजित पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 1975 में दिल्ली विश्वविद्यालय में हुआ था और आपके द्वारा इस कार्यक्रम की कार्यवाही का संपादन एवं प्रकाशन दो खण्डों में किया है। इसके बाद आपने दिल्ली में दो और विश्व दर्शन सम्मेलनों का आयोजन किया। आपने 21 पुस्तकों का लेखन और संपादन किया है और आपके 200 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हैं।
आपकी महत्वपूर्ण प्रकाशन हैं - The Philosophy of Pancharatra; Studies in Ramanuja Vedanta; Knowledge, Values and Education; Buddhist Epistemology; The Concepts of Atman and Paramatman in Indian Thought; Vedic Wisdom, Cultural Inheritance and Contemporary Life; Juche Social and Political Philosophy; Major Religions of the World; Applied Philosophy, Value Theory and Business Ethics; Buddhist Thought and Culture in India and Korea(Ed.) ; Buddhist Thought and Culture in India and Japan (Ed.); Glimpses of Buddhist Thought and Culture(Ed.);Knowledge, Culture and Value(Ed.); Reality, Knowledge and value(Ed.); Nyayamanjari of Jayanta Bhatta (Hindi translation of one part from Sanskrit).  इसके अतिरिक्त आपने भारतीय ऐतिहासिक त्रैमासिक में प्रकाशित आठ खंडों में बौद्ध धर्म के सभी दस्तावेजों को इकट्ठा और वर्गीकृत किया और आपने सभी खंडों में विस्तृत विषय-प्रवेश भी लिखा है। आप 2000 में टोक्यो, जापान में ‘एशिया में हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म के प्रसार और प्रभाव’ पर भारत-जापान संगोष्ठी के सह-संयोजक रहे हैं। आप 'होलिस्टिक साइंस एंड इंटीग्रेटेड लिविंगिं' पर रिज, टेनेसी, संयुक्त राज्य अमेरिका, 2010 में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजकों में से एक थे। आप एक अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका –होलिस्टिक विजन के संपादक हैं। आप कई अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं के संपादक मंडल के सदस्य हैं।